आखिर क्या है ? अरावली का 100 मीटर विवाद , जिसमें छिड़ गया बड़ा घमासान , देखे पूरी रिपोर्ट

👇 ख़बर को सोशल मीडिया पर शेयर करे 👇

आशिष चौधरी @ जयपुर राजस्थान में अरावली की पहाड़ियां एक बार फिर सियासी टकराव का केंद्र बन गई हैं। अरावली की परिभाषा को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है और भाजपा व कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा का आरोप है कि आज #SaveAravalli अभियान चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में ही अरावली को लेकर ‘100 मीटर’ की परिभाषा की सिफारिश की गई थी।

पूर्व सीएम अशोक गहलोत का कहना है कि उनकी सरकार ने रोजगार और विकास को ध्यान में रखते हुए 100 मीटर की परिभाषा का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। गहलोत का दावा है कि उनकी सरकार ने न्यायपालिका के आदेश का पूरी तरह पालन किया और इसके बाद फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) से अरावली क्षेत्र की मैपिंग करवाई गई।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट 2010 में खारिज कर चुका था, उसी परिभाषा को 2024 में मौजूदा भाजपा सरकार ने केंद्र सरकार की समिति के समक्ष फिर से समर्थन क्यों दिया? क्या इसके पीछे किसी तरह का दबाव था या कोई बड़ा हित छिपा है?

वहीं भाजपा की ओर से पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों को भ्रम फैलाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि 100 मीटर का मानदंड केवल ऊंचाई तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृत परिभाषा के अनुसार 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची पहाड़ियां, उनकी ढलानें और दो पहाड़ियों के बीच 500 मीटर के दायरे में आने वाला क्षेत्र पूरी तरह खनन से बाहर है, चाहे उस इलाके की ऊंचाई कुछ भी हो। राठौड़ ने इसे पहले से अधिक सख्त और वैज्ञानिक व्यवस्था करार दिया और कहा कि इससे अरावली क्षेत्र में खनन बढ़ने के बजाय नियंत्रण और मजबूत होगा।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के तहत फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अरावली पहाड़ वह भू-आकृति मानी जाएगी जो स्थानीय धरातल से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची हो। इसमें पहाड़ की ढलान और उससे जुड़े क्षेत्र भी शामिल होंगे। इसके अलावा यदि दो या दो से अधिक अरावली पहाड़ आपस में 500 मीटर के भीतर स्थित हैं, तो उन्हें एक पर्वतमाला माना जाएगा और उनके बीच की घाटी या छोटे टीले भी संरक्षण के दायरे में आएंगे।

असल विवाद 2010 से 2025 के बीच बदले एक तकनीकी शब्द को लेकर खड़ा हुआ है। वर्ष 2008 की जीएसआई रिपोर्ट में ‘पॉलिगोन लाइन’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जिसे 2025 की रिपोर्ट में बदलकर ‘कंटूर’ कर दिया गया।
जीएसआई के पूर्व महानिदेशक और अरावली कमेटी के सदस्य रहे दिनेश गुप्ता के अनुसार, पॉलिगोन लाइन का मतलब यह था कि 100 मीटर या उससे ऊंची दो पहाड़ियों के बीच मौजूद 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ी भी उसी संरचना का हिस्सा मानी जाएगी और उसे संरक्षण मिलेगा।

यही शब्दों का बदलाव आज अरावली को लेकर सियासी घमासान की बड़ी वजह बन गया है, जिसने पर्यावरण संरक्षण और खनन नीति को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है।

👇 ख़बर को सोशल मीडिया पर शेयर करे 👇

आशिष चौधरी

आशिष चौधरी राजस्थान के झुंझुनू जिले मे जन्मे एक पत्रकार है जो दैनिक भास्कर , फर्स्ट इंडिया न्यूज , समाचार जगत जैसे प्रमुख मीडिया हाउस मे काम कर चुके है , वर्तमान मे फिलहाल AC NEWS INDIA NETWORK से जुड़े हुए है जो की शेखावटी का बढ़ता हुआ मीडिया समूह है

Related Posts

भाजपा किसाना मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी में किसान आंदोलन के गढ़ से बिजाराणिया को मौका

👇 ख़बर को सोशल मीडिया पर शेयर करे 👇

  सीकर। कई महीनों के इंतजार के बाद भाजपा किसान मोर्चा की कार्यकारिणी अनलॉक हो गई है। कार्यकारिणी में किसानों के मजबूत गढ़ माने जाने वाले धोद विधानसभा क्षेत्र के…

👇 ख़बर को सोशल मीडिया पर शेयर करे 👇

Jaipur News: सी के बिरला हॉस्पिटल्स में 8 घंटे की जटिल सर्जरी, 48 सेमी का कैंसर ट्यूमर निकालकर मरीज को दी नई जिंदगी

👇 ख़बर को सोशल मीडिया पर शेयर करे 👇

जयपुर। राजधानी जयपुर के सी के बिरला हॉस्पिटल्स जयपुर के सीनियर ऑन्कोसर्जन डॉ. आनंद मोहन और उनकी टीम ने एक अत्यंत जटिल एवं दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने…

👇 ख़बर को सोशल मीडिया पर शेयर करे 👇

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ये भी पढ़े

पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ नरेंद्र सिंह शेखावत का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ा

पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ नरेंद्र सिंह शेखावत का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ा

भाजपा किसाना मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी में किसान आंदोलन के गढ़ से बिजाराणिया को मौका

भाजपा किसाना मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी में किसान आंदोलन के गढ़ से बिजाराणिया को मौका

Jaipur News: सी के बिरला हॉस्पिटल्स में 8 घंटे की जटिल सर्जरी, 48 सेमी का कैंसर ट्यूमर निकालकर मरीज को दी नई जिंदगी

Jaipur News: सी के बिरला हॉस्पिटल्स में 8 घंटे की जटिल सर्जरी, 48 सेमी का कैंसर ट्यूमर निकालकर मरीज को दी नई जिंदगी

NEET UG 2026: सोशल मीडिया से बनाई दूरी, सेल्फ स्टडी को बनाया हथियार; री-NEET में ऐलन के कार्तिक के AIR-18 आई

NEET UG 2026: सोशल मीडिया से बनाई दूरी, सेल्फ स्टडी को बनाया हथियार; री-NEET में ऐलन के कार्तिक के AIR-18 आई

पहला साल… बेमिसाल: नीट में पार्थ कोचिंग का शानदार प्रदर्शन, पहली बार में 600 सेलेक्शन दिए

पहला साल… बेमिसाल: नीट में पार्थ कोचिंग का शानदार प्रदर्शन, पहली बार में 600 सेलेक्शन दिए

Polar JEE Academy का बड़ा ऐलान: JEE Olympiad 2026 से छात्रों को मिलेगा 17 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का मौका

Polar JEE Academy का बड़ा ऐलान: JEE Olympiad 2026 से छात्रों को मिलेगा 17 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का मौका