सीकर/एनआर मनोहर। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित री-नीट 2026 के परिणाम में सीकर के ऐलन क्लासरूम के छात्र कार्तिक जैन ने शानदार सफलता हासिल की है। कार्तिक ने 720 में से 701 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR)-18 हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने वर्ष 2021 में आठवीं कक्षा से ही नीट फाउंडेशन की तैयारी शुरू कर दी थी और पहले ही प्रयास में देशभर की टॉप रैंकर्स की सूची में जगह बनाई।पिछले पांच वर्षों से सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे कार्तिक का सपना देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर एक सफल डॉक्टर बनने का है। उनका कहना है कि माता-पिता के चेहरे पर खुशी देखने की चाह ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। इसी लक्ष्य ने उन्हें लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
तैयारी का सफर आसान नहीं
कार्तिक ने बताया कि तैयारी का सफर आसान नहीं था। कई बार मानसिक दबाव और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना है कि आत्मविश्वास, अनुशासन और नियमित पढ़ाई ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने बताया कि 3 मई को आयोजित पहली नीट परीक्षा के बाद उन्हें उम्मीद के मुताबिक रैंक मिलने की संभावना नहीं दिख रही थी, जिससे वे काफी निराश हो गए थे। बाद में परीक्षा रद्द होने और री-नीट आयोजित होने की घोषणा उनके लिए दूसरा अवसर साबित हुई।
6
से 8 घंटे सेल्फ स्टडी पर फोकस
उन्होंने पहली परीक्षा की कमियों का विश्लेषण किया, कमजोर विषयों पर दोबारा मेहनत की और पूरी लगन से तैयारी शुरू की। इसका परिणाम यह रहा कि री-नीट में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-18 हासिल कर ली। कार्तिक ने बताया कि कोचिंग के अलावा वे प्रतिदिन 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे। तनाव होने पर माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों से खुलकर बात करते थे। उन्होंने तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर उनका कोई अकाउंट नहीं था।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं
नीट अभ्यर्थियों के लिए कार्तिक का संदेश है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास और गलतियों से सीखने की आदत ही सफलता तक पहुंचाती है। यदि पहली बार सफलता नहीं मिले तो निराश होने के बजाय उसे सीख मानकर अगले अवसर के लिए और बेहतर तैयारी करनी चाहिए।




