नीमकाथाना क्षेत्र के नजदीक हीरानगर गांव निवासी मंजू धायल ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। मंजू धायल का भूगोल विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन हुआ है। खास बात यह है कि उन्होंने प्रथम प्रयास में 26वीं रैंक हासिल कर यह उपलब्धि अपने नाम की।
वर्तमान में मंजू धायल मालनगर स्कूल में थर्ड ग्रेड अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं और पिछले 13 वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले वे दो बार थर्ड ग्रेड अध्यापिका रह चुकी हैं। अध्यापन कार्य के साथ-साथ उन्होंने स्वाध्याय करते हुए एमए (भूगोल) की पढ़ाई पूरी की।
मंजू धायल ने आरएएस परीक्षा भी तीन बार दी, हालांकि सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उल्लेखनीय है कि उन्होंने कहीं भी कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर ही अपने पति के सहयोग से पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया।
मंजू धायल का परिवार भी शिक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पति स्वयं शिक्षक हैं, देवर प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं, दो बहनें सरकारी अध्यापिका हैं और पिता सेवानिवृत्त शिक्षक रह चुके हैं। इसी शैक्षणिक माहौल ने उनकी सफलता की मजबूत नींव रखी।
गौरतलब है कि मंजू धायल हीरानगर गांव की पहली महिला अध्यापिका बनी थीं और अब पहली महिला असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर उन्होंने गांव का नाम रोशन किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है।
मंजू धायल की सफलता ग्रामीण युवाओं और विशेषकर महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।
