मुकेश कुमार @ छोटीसादड़ी पूरे देश में काले सोने यानी अफीम की तस्करी के लिए माने जाने वाले प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी इलाके में इन दिनों खेतों में लहलहा रही बहुमूल्य अफीम की फसल पर सफेद फूल आने का दौर शुरू हो गया है। इससे अफीम उत्पादक किसानों में खुशी छाई हुई है। फूल खिलने के बाद इस पर डोडा निकलेगा। जिस पर किसान आने वाले कुछ दिनों में विधि विधान से मां काली की पूजा:अर्चना कर डोडे पर चीरा लगाकर अफीम का दूध संग्रहित करने के कार्य में जुट जायेंगे। वही इस बहुमूल्य फसल को बचाने के लिए किसान इन दिनों खेत में रातजगा कर रहे हैं। यह किसी मन्नत या शौक के लिए नहीं बल्कि इस फसल की जंगली जानवरों से रखवाली के लिए कर रहे हैं। ऐसे में ठंड की सर्द रात में किसान इस बहुमूल्य फसल को बचाने में लगे हुए हैं। जिससे उनके द्वारा की गई खून -पसीने की मेहनत का अच्छा फल मिल सके। किसान अपने खेतों के चारो और फसल को बचाने के लिए तारबंदी तक कर रहे हैं।वही किसानों ने बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव के दौर चलने से इस फसल को रोग से बचाने के लिए विभिन्न प्रकार की कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि इस फसल में काली मस्सी, सफेद मस्सी, खांखरिया रोग, तना सड़न एवं पत्ते में पीलापन आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मौसम परिवर्तन से बदला पत्तो का रंग,लगा पीला रोग
काले सोने की खेती करने वाले किसानों पर मौसम की मार पड़ रही है। अफीम की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि अफीम की फसल मौसम पर ही आधारित है। लेकिन जनवरी माह में अचानक मौसम परिवर्तन से पारे में हुई बढ़ोतरी से किसानों के सामने चिंता की लकीरें खिंच दी है।मौसम परिवर्तन के कारण अफीम के पत्तो का रंग बदल गया है। इनका रंग पीला हो गया है।किसानों की माने तो अफीम की फसल पिला रोग से ग्रस्त हो चुकी है।किसान बताते है कि पिला रोग के कारण डोडो से दूध उड़ जाता है।जिसके कारण डोडो में दूध नही बनता है और औसत पूरी नही होती है।
देसी घरेलु नुस्खे से किसान भगा रहे हैं नील गायों को
कोई किसान फसल को नीलगायों से बचाने के लिए किसान पटाखे छोड़ कर तो कोई किसान पक्षियों से इस बहुमूल्य फसल को बचाने के लिए विभिन्न जतन कर रहे हैं। वहीं कई किसान नीलगायों के उत्पात व नुकसान से फसल को बचाने के लिए खेत के चारो और साड़ियां लपेट रहे हैं, तो कोई किसान ऑडियो-वीडियो की रील तो कोई खेत के चारों ओर लोहे की तारबंदी आदि खेत के चारों और लगाकर फसल को बचाने का जतन कर रहे हैं। अभी क्षेत्र में अफीम की फसल लहलहा रही है । इससे किसानों में खुशी छाई हुई है। रात के समय झुंड के रूप में नीलगाय खेतों में घुस जाती है और अफीम की फसल चट कर मदमस्त होकर फसल को रौंदकर चली जाती है।
चीरा लगते ही दस्तक देने लगेंगे तस्कर
बता दे कि प्रतापगढ़ व चित्तौड़गढ़ जिले पूरे देश में काले सोने की तस्करी के लिए जाने जाते हैं।यहां मौसम की अनुकूलता एवं अच्छी पैदावार के चलते अफीम की फसल का अच्छा उत्पादन होता है। ऐसे में इसकी तस्करी का अवैध कारोबार भी शुरू हो जाएगा। इस वर्ष अफीम की फसल की अच्छी पैदावार होने की आस लगाए बैठे मारवाड़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात व महाराष्ट्र के तस्कर स्थानीय तस्करों से इसके अवैध तस्करी के लिए संपर्क साधने में लग गए हैं और लुवाई-चिराई का दौर शुरू होने के बाद तस्कर काला सोना यानी अफीम का अवैध रूप से परिवहन कर अपने क्षेत्र में ले जाएंगे।
पुलिस तस्करी रोकने के लिए मुस्तैद
किसानों द्वारा आने वाले दिनों में अफीम दूध संग्रहित करने की तैयारियों से पहले ही पुलिस ने तस्करी ओर इसका अवैध परिवहन रोकने के लिए अभी से कमर कस ली है।इलाके में पुलिस लगातार बाहरी संदिग्ध लोगों की निगरानी कर रही है। वहीं मुखबिर तन्त्र ओर ज्यादा सक्रिय कर दिया है। ताकि इसकी अवैध तस्करी रोकी जा सके।
रिपोर्ट : मुकेश कुमार (प्रतापगढ़)
